आखिर गलती किसकी..?

आप लोग सोच रहे होंगे  कि इस शीर्षक का मतलब क्या है ? चलिए आपसे कुछ दो चार बातें हो जाएं समाज के तौर-तरीकों पर /

आज जो भी बलात्कार से संबंधित हालात है समाज में कहीं ना कहीं हम लोग भी जिम्मेदार हैं वह कैसे?   तो चलिए जनाब आप को समझाते हैं,,,,,,,

हम अपनी बेटियों को  पैदा होते ही सभ्यता संस्कार मान मर्यादा सभी कुछ सिखाते हैं ,कैसे कपड़े  पहनो वगैरा-वगैरा आदि आदि .मगर कभी लड़कों को संस्कार सभ्यता मर्यादा और कैसे उठना चाहिए, कैसे बैठना चाहिए, कैसे किसी को देखना चाहिए, किस नजरिए से देखना चाहिए?  नहीं   समझाते

मां की जिम्मेदारी ____

एक मां अपनी बेटी को हमेशा संस्कार सभ्यता सिखाती रहती है, हमेशा उसको दायरों में रहना सिखाती है/ अच्छी बात है सिखाना भी चाहिए   लेकिन_____ 

 यही संस्कार सभ्यता मर्यादा____

   बेटों को क्यों नहीं सिखाया जाता है ?

क्या एक मां का कर्तव्य नहीं है कि अपने बेटे को भी पास बिठाकर तमीज तहजीब और दायरे में रहना  सिखाएं .।

मुझे ऐसा लगता है कि लड़कों को  पिता से ज्यादा अपनी मां की बात ज्यादा समझ में आएगी,

क्योंकि हम जिस समाज में रहते हैं वहां एक पिता अपने बेटे से बात करने में हिचकिचाता रहता है ।

यहां पिता बेटा से बात करने में संकोच करता है मां अपनी बेटी से बात करने में संकोच करती है कितनी अजीब विडंबना है ना, मां सिर्फ मां रहना चाहती है वह बेटी के दोस्त बनने में उसे लगता है कि उसकी बेटियां सम्मान करना बंद कर   देंगी

निर्भया केस,  हाथरस  केस और ना जाने कितने केस जिनको कि हम जानते भी नहीं हैं से क्या कभी हम सबक ले पाएंगे ,क्या मां-बाप नहीं चाहते कि हमारे बेटे उस गलत रास्ते पर ना जाएं जिससे उन्हें जीवन यात्रा समाप्त करने का दंड भुगतना पड़े

मैं  निर्भया केस पर ज्यादा फोकस करूंगी क्योंकि इसको बहुत टाइम हो चुका है और हमारे बेटों के मां बाप ने कितना कुछ सीखा इन केसोंसे और कितना कुछ अपने बच्चों को सिखाया इस पर कभी उन्होंने विचार किया .।

हाल ही में कुछ दिन पहले हैदराबाद केस हुआ था जिसमें एनकाउंटर हुआ था बच्चों का, तो मेरे दिमाग में विचार आया कि वह बच्चे क्या सोच रहे होंगे मृत्यु के समय कि काश उनके मां-बाप ने समय रहते उनकी परेशानी समझी होती और उन्हें सही दिशा का ज्ञान कराया होता तो शायद आज हमारी यह दशा न  होती

पर हमने न ही निर्भया केस से और न ही हैदराबाद केस से कोई सबक लिया है कि अब हमें अलर्ट होना चाहिए अपने बच्चों के प्रति क्योंकि टेक्नोलॉजी की वजह से बच्चों को बहुत ही कम एज में वल्गर नॉलेज मिल जाती है और उनके अंदर एक एनर्जी डेवलप हो जाती है जिसको वह कहीं ना कहीं निकालना चाहते हैं, 

चलिए शायद यह एक अलग मैटर है जिस पर अलग चर्चा करूंगी_

मेरे बच्चे खुद बोलते हैं कि अपने देश में मां बाप बच्चों से बात करने को बड़ा अचंभा समझते हैं एक टैबू क्यों हो जाता है बच्चों से बात करना, क्या वह कभी  मां बाप …..बच्चे नहीं थे? उनके साथभी प्रॉब्लम्स होती  टीनएज मे  जवानी मे … तो बच्चों से डिस्कशन करने में क्या जाता है, हां यह जरूरी है कि बच्चा किस एज  ग्रुप का है और उसे कितनी जानकारी होनी चाहिए लेकिन आपका बच्चा भटक रहा है तब तो उसे हर चीज का नॉलेज देना ही चाहिए_।

लड़के भी मां के ज्यादा करीब होते हैं_

 आप सोच रहे होंगे कि एक मां अपने बेटों से कैसे बात कर सकती  है………………… मगर कर सकती हैं ,संकोच भी लगता है तो उस बात को ध्यान में रखिए किआपके बेटे की एक गलती से वह   जेल की हवा भी खा सकता है और फांसी के फंदे पर भी   झूल सकता है ,तब आप सोचेंगे कि समय रहते हमने अपने बच्चों को सही गलत का ज्ञान कराया होता तो कितना अच्छा होता, मैंने मां को इसलिए कहा है क्योंकि पिता नेभी अपनी उम्र में वही गलतियां की होंगी जो हर पीढ़ी अपने जवानी के दौर में करते हैं और उनकी इन हरकतों से हर पीढ़ी की  नवयौवना  या कोई भी महिला को कितना कष्ट उठाना पड़ता है ,कितनी मानसिक पीड़ा पहुंचती है कितनी घुटन होती है इसका अंदाजा तुम लड़के या पुरुष नहीं  लगा सकते हैं, तुम्हारे लिए जो मनोरंजन है वह किसी के लिए प्राणघातक पीड़ा से कम नहीं है, चलिए मैं कुछ आसान सी बात बताती हूं कि कैसे हम अपने बच्चों को वह फील कराएं की महिलाओं को कैसे दर्द होता है मैं तो कहूंगी बच्चों को ही नहीं अपने पतियों को अपने बाप को जो भी हमारे घर में पुरुष वर्जन हैं सभी को एहसास घर की स्त्रियां ही कराएं कि जो भी हरकत इस तरीके के पुरुष वर्ग करता है स्त्रियों को कितनी तकलीफ होती है बेटियों को कितनी तकलीफ होती है चलिए  अभी मैं बच्चों के बारे में बात कर रही हूं तो उसी के बारे में बात करती हूं एक मां समझा सकती हैं कि जब वह यंग लड़की थी क्लास में उसे कोई परेशान करता था तो कितना बुरा लगता था कितनी शर्मिंदगी महसूस होती थी और यह लगता था कि शायद गलती मेरी है जो लड़के मुझे इस तरीके से छेड़ रहे हैं या परेशान कर रहे हैं जबकि मेरी कोई गलती नहीं होती थी और मेरी गलती न होते हुए भी मैं अपने घर में कुछ भी नहीं बताती थी क्योंकि ज्यादातर घरों में यही होता है लड़की को ही गलत साबित कर दिया जाता है ,आप बता सकते हैं कि लड़कियों की सुंदरता देखने का सबका मन होता है तो सुंदरता को शालीनता की नजर से देखा जाता है ना कि उसे खा जाने वाली नजर से नहीं तो आप एक उदाहरण पेश कर सकती हैं उदाहरण क्या हो सकता है मैं आपको बताती हूं आप अपने बच्चे को फूलों वाले बाग में लेकर जाइए और बताइए उसको पूछिए उससे कि जो बाग में फूल लगे हैं इसकी वजह से बाग सुंदर है या केवल बाग सुंदर है या केवल हरे पत्ते अकेले होते इस बाग में तो क्या बाग में सुंदरता होती तो जाहिर सी बात है कि आपके बच्चे का जवाब होगा कि नहीं यह बाघ फूलों की वजह से सुंदर है रंग बिरंगे फूलों की वजह से सुंदर है उसके साथ भरे तितलियां सब कुछ उसकी वजह से सुंदर लग रहे हैं तो आप पूछिए कि कोई टिड्डा दल इस फूलों को आकर कुचल दे मसल दे तो क्या होगा?और जवाब आप बच्चे को देने दीजिए आपका बच्चा खुद ही जवाब देगा कि  बाग, वीरान हो जाएगा बदसूरत लगने लगेगा.।तो आप अपने बच्चों से पूछिए कि अगर हर साल टिड्डा दल आकर केवल फूलों या कलियों को मसले तो क्या अगले साल  बागवानअपने खेतों में फूलों की खेती करेगा आपका बेटा कहेगा नहीं । तब आप ठीक से समझाइए उसको कि इसी तरीके से अगर हमारी बच्चियों और बेटियों को पुरुष समाज ऐसे ही कुचलता रहेगा तो कहीं ऐसा ना हो कि स्त्रियाँ ….स्त्रियों को पैदा ही करना छोड़ दें ,या पैदा होते ही गला घोटना शुरू कर दे,।क्योंकि बलात्कार की जो पीड़ा होती है वह महिला और महिला से संबंधित महिला रिश्तेदार अगर वह मां है तो बहुत ही भयानक होती है, समाज में स्त्री और पुरुष दोनों को ही बराबर से सम्मान मिलना चाहिए यदि ईश्वर एक ही कृति बनाता केवल पुरुष पुरुष या स्त्री स्त्री तो समाज में सुंदरता नहीं रहती ।स्त्री पुरुष के कारण एक आकर्षक सृष्टि लगती है, एक दूसरे के प्रति आकर्षित होना एक सृष्टि का नियम है और यह नियम सृष्टि के सृजन के लिए है ताकि है स्त्री और पुरुष एक दूसरे के प्रति आकर्षित हों उनका मिलन हो और सृष्टि सृजन में  उसकी भागीदारी हो.। मगर यही आकर्षण पुरुष   को हैवान बना दे तो समाज का विध्वंस भी होगा और ईश्वर भी नाराज होगा और जो भी इस समाज को विध्वंस करने के लिए हैवान बन जाएगा उसको दंड निश्चित मिलना  चाहिए, और यदि तुम ऐसी गलती करोगे तो तुम्हारे साथ भी वही हर्ष होता होगा जो एक अपराधी या बलात्कारी के साथ होता है और मैं इसमें तुम्हें बचाने का कोई भी उपाय नहीं करूंगी क्योंकि मैं एक स्त्री हूं और स्त्री का सम्मान क्या होता है मैं अच्छी तरह से जानती हूं और कभी भी मेरी औलाद ने ऐसा कोई कृत्य किया तो मैं समझूंगी कि इससे अच्छा तो मैं बेऔलाद होती तो अच्छा रहता मुझे लगता है एक बार मां को अपने बच्चों से बात जरूर करनी चाहिए खासकर बेटों से ताकि वह कोई गलत रास्ता ना पकड़ सके और कभी उनकी गलती पर आपसे यह ना कह सके कि आपने हमें सही संस्कार नहीं दिए मुझे लगता है एक कोशिश तो करनी ही चाहिए बाकी जानती हूं कि जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां बाप की नहीं सुनते हैं पर हम अपने बच्चों को नए संस्कार अच्छे संस्कार देने के लिए हमेशा कोशिश करते रहते हैं तो बेटे को भी संस्कार देने के लिए हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए अपने बच्चे को बताइए कि स्त्री की बिना मर्जी  के कोई भी उसे छुये यह स्त्री को कभी भी गवारा नहीं होता है चाहे वह तुम्हारे पिता यानी कि मेरे पति ही क्यों ना हो उसके लिए कष्ट  कारीहोता है स्त्री को प्रेम से पाना चाहते हो तो वह आत्मसमर्पण खुद ही कर देती है ।

 चलिए दोस्तों यह तो हो गई मां और बेटे के बीच की बात अब आगे बात करती हूं —-

हम सभी स्त्रियां जानते हैं कि हमारे घर के पुरुष कैसे हैं चाहे वह पति हो पिता हो भाई हो बेटा हो फिर भी हम अपने घर के पुरुषों को किसी गलत बात पर रोकते नहीं हैं, अगर आपके सामने आपके घर के पुरुष किसी बाहर वाली स्त्री के बारे में गलत कमेंट करते हैं या कोई भद्दी बात करते हैं तो आपको तुरंत रोकना चाहिए और बोलना चाहिए कि आप किसी को बुरी नजर से देखते हो, तो आपके घर की भी बहन बेटी पत्नी मां को भी दूसरे  लोगों द्वारा इसी नजर से देखा जाता होगा।. पर वाह रे हमारा समाज हमारा पति ही आकर बोले कि वह औरत ऐसी है वह औरत  चरित्रहीन  है या उसका फिगर ऐसा है वैसा है

 फिर भी हम स्त्रियां कभी ध्यान नहीं देती हैं क्योंकि हमें लगता है कि जब औरतें गलत होती है तभी  ही पुरुष कुछ बोलता है और हम खुद स्त्रियां बहुत सती सावित्री हैं इसलिए दूसरा पुरुष हमारे वाले बारे में गलत धारणा नहीं बना सकता है जबकि यह टोटली बकवास है  अधिकांश  पुरुष केवल अपने घर की बहन बेटियों को ही सम्मान देता है गैरों के लिए उसकी अलग ही फितरत होती है अगर कुछ पुरुष में महिलाओं के प्रति सम्मान नहीं है तो वह किसी भी महिला का सम्मान नहीं कर सकता है चाहे वह महिला कितनी भी अच्छी क्यों ना हो ?

अगर हम सभी महिलाएं चाहते हैं कि हमारी बहन बच्चियां खुद हम स्त्रियां सुरक्षित रहें तो हमें अपने घर के पुरुषों से ही शुरुआत करनी होगी उनकी गलत बातों का उनकी गलत हरकतों का हमें विरोध करना चाहिए और उन्हें समझाना चाहिए जिस तरह आप चाहते हैं कि हमारी इज्जत बनी रहे उसी तरह हर घर की स्त्रियां सम्मानीय होती हैं

चलिए सभी स्त्री जनों  से ही हम शुरुआत करते हैं अपने ही आसपास अपने ही रिश्तेदार पुरुषों को समझा कर शायद कुछ हद तक हम बलात्कार जैसी घटनाओं पर  रोक लगा सकते हैं 

और नेताओं जन से तो मेरा इतना ही कहना है कि —

बलात्कारी सिर्फ बलात्कारी होता है

 न  वह तेरे राज्य का होता है न वह मेरे राज्य का होता है,…. होता है तो सिर्फ भारत देश के ऊपर एक कलंक होता है.

जिसे सात पीढ़ियां सुकर्म करके भी इस कलंक का बोझ अपने सुकर्मों से नहीं उतार  सकती ।

आशा करती हूं दोस्तों कि मेरी बातें आपको अच्छी लगी हो  कहीं भी कमियां नजर आए तो फीडबैक जरूर दीजिएगा

 धन्यवाद दोस्तों

बात अच्छी लगे तो लाइक एंड शेयर 

Treading

More Posts