एक राजा था और उसके राज्य में एक फौजी था। फौजी के पास बहुत पैसा था। एक दिन राजा ने फौजी से बोला मिलकर व्यापार करते हैं। व्यापार से दोनों को बहुत फायदा हुआ। और व्यापार तरक्की पर चल पड़ा। एक बार फौजी को युद्ध में जाना पड़ा। फौजी अपनी घोड़ी पर सवार होकर युद्ध के मैदान में गया फिर दुश्मनों को मारते हुए उस की घोड़ी बहुत आगे निकल गई और एक जगह दुश्मनों के बीच खड़ी हो गई और बचाव के लिए न वह भागी न ही उसने कोशिश की। और फौजी मारा गया। जब राजा ने सुना तो बहुत खुश हुआ कि उसको अब फौजी का हिस्सा नहीं देना पड़ेगा। सारी धन दौलत और व्यापार उसका हो जाएगा इस कारण मारे खुशी के फूला नहीं समाया।इधर राजा के कोई संतान नहीं थी पर फौजी के मरने के बाद उसके घर में एक पुत्र रत्न प्राप्त हुआ। राजा और राज महल में खुशियां छा गई। पुत्र बड़ा हुआ उसका विवाह भी हुआ। बहुत सुंदर बहू आई जिससे राजा बहुत खुश हुआ। उसे दुनिया की सारी खुशियां मिल गई ऐसा सोचता था। पर विवाह के पश्चात् पुत्र बीमार रहने लगा। राजा ने बहुत इलाज करवाया मगर वह ठीक नहीं हुआ। राजा कहीं इलाज के लिए अपने पुत्र को ले जा रहा था तो रास्ते में एक साधु मिला और उसने कहा कि उधर जंगल में उन साधु से 

“दो आने की दवा लेकर आओ” ठीक हो जाएगा। राजा उस जंगल में उस साधु के पास गया और दो आने की दवा खिलाई। दवा खाकर पुत्र ठीक हो गया मगर घर आकर पुत्र मर गया। राजा विलाप करने लगा तब वही साधु जो रास्ते में मिला था ने आकर बोला क्यों शोक मना रहे हो। मेरा पुत्र मर गया है तो मैं दुखी तो होऊंगा ना महाराज..!

राजा ने कहा। 

तो साधु ने कहा जब वह फौजी मरा था तब तो आपने विलाप नहीं किया था।  राजा आश्चर्य से उसकी तरफ देखने लगा। बोले क्या मतलब महाराज। साधु ने कहा फौजी ही तुम्हारा पुत्र बन कर आया था। जितना आपने उसका पैसा अपने पास रख लिया था, उसने वह पैसा इलाज के रूप में वसूल कर लिया।तो राजा बोला फिर दो आने की दवाई के लिए आपने क्यों कहा था?तो उसने कहा कि दो आना बाकी था और दो आना खर्च करवाना था। राजा ने फिर पूछा उन सब में मेरी बहू की क्या गलती थी बहू को क्यों कष्ट सहना पड़ रहा है?  उसे जिंदगी के बीच भंवर में  क्यों खड़ा कर दिया। तब साधु ने राजा को बताया कि पिछले जन्म में आपकी बहू वही घोड़ी थी जो आपके पुत्र को दुश्मनों के बीच ले जाकर खड़ा करके मृत्यु का कारण बनी थी।

इसलिए इस जन्म में फौजी ने उसे जीवन के भंवर जाल में बीच में खड़ा कर दिया।

साधु बोला_राजन अब आपको कर्मों का हिसाब किताब समझ आ गया होगा।

राजा ने कहा जी महाराज।

मुझे कर्मों का हिसाब किताब बहुत अच्छे से समझ आ गया।

साधु ने राजा से कहा जो बोया जाएगा वही काटा जाएगा और वो लिया जाएगा इसी पृथ्वी पर दिया भी जाएगा। ऊपर स्वर्ग नरक कुछ नहीं होता है। जो होता है यही भोगना पड़ता है।

धन्यवाद दोस्तों

स्वरचित पूर्णाधिकार

5-1-21

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