, हेलो दोस्तों आजकल एक पोस्ट बहुत वायरल हो रही है जिसमें कहा जा रहा है कि क्रिसमस डे को तुलसी पूजन करेंगे।

हम सनातनियों के यहां सुबह-शाम पूजा आरती व तुलसी वंदन एक दैनिक कर्म है।

मगर हम यह कह कर कि क्रिसमस डे को लाइटिंग और केक नहीं काटेंगे मगर इस त्यौहार को हम अपने तरीके से यानी कि तुलसी पूजन करके मनाएंगे।

अरे मेरे बुद्धिजीवियों जब क्रिसमस डे से कोई मतलब ही नहीं है तो इस दिन को विशेष महत्व देने के लिए तुलसी पूजन चलन क्यों शुरू कर रहे हैं।

जनाब कौन सा क्रिस्चियन हैं जो हमारे त्यौहारों को अपने ढंग से मनाता हो लेकिन हम निकल पड़े हैं क्रिसमस डे को अपने ढंग से मनाने के लिए।

(कुछ लोग पोस्ट में लिख रहे हैं कि क्रिसमस डे को हम तुलसी पूजन दिवस के रूप में मनाएंगे  मेरी यह बात केवल उन्हीं लोगों के लिए है।)

यह क्या बात हुई जनाब क्रिसमस डे को हम ईसाईयों की तरह नहीं बल्कि हम भारतीय परंपरा से मनाएंगे। पर क्रिसमस डे को मनाएंगे जरूर।

यह तो वही बात हुई जनाब नाक  को चाहे हम सीधे हाथ से पकड़े या बाएं हाथ से पकड़े। काम तो हमने नाक पकड़ने का ही किया है।

*अब हमारी तुलसी मां को क्रिसमस डे का इंतजार करना पड़ेगा।

कमाल के बुद्धिजीवी हैं हमारे यहां ।कभी किसी ने देखा है कि नव दुर्गों के टाइम कोई क्रिश्चियन केक खिलाकर कन्या पूजन करता हो।

 फिर हम लोग क्यों उनके स्पेशल डे को स्पेशलिटी दे रहे हैं।

*हमारी तुलसी मां प्रतिदिन वंदनीय थी और वंदनीय हैं और वंदनीय रहेंगी।*

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हमारे धार्मिक रीति रिवाज और त्यौहार इतने भी कम नहीं हैं कि हमें किसी के स्पेशल डे मे अपने देवी-देवताओं का पूजन करना पड़े।

कहीं 23हम सनातनीयों को ये क्रिश्चियन यह  ना कहने लगे कि हमारी क्रिसमस डे के दिन तुम्हारी तुलसी मां का जन्म हुआ था। हमारे क्रिसमस डे ने ही तुम्हारे तुलसी पूजन की शुरुआत करवाई।क्योंकि इसके पहले तो तुम्हें होश ही नहीं था कि  तुलसी पूजन करना है।होश था तो हमारे क्रिसमस डे को ही तुलसी पूजन क्यों?

अपनी संस्कृति का मान मत गिराओ यारों।

मेरे प्यारे दोस्तों और बुद्धिजीवियों क्या कभी आपने सुना है या देखा है हमारे त्यौहारों को वह अपने ढंग से मनाते हो।

(जिन्होंने हिंदू धर्म अपना लिया है मैं उनके बारे में बात नहीं कर रही हूं।)

क्या कोई क्रिश्चियंस हमारे रामनवमी या जन्माष्टमी को मंदिर में जाकर केक खिलाते हुए उनको जन्मदिवस की बधाई देते हुए देखा है।

जब हमारे यहां पितर पक्ष होते हैं तो क्या कोई भी क्रिश्चियन उन 15 दिनों में अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर उनकी शांति के लिए प्रेयर करता हो या उन्हें भोजन समर्पण करता हो।

क्या हमारे नवरात्रि पर क्रिश्चियन लोग उनको पवित्र दिन मान कर अपना मदर्स डे डॉटर्स डे मना लेते हैं।

अभी बनाएंगे जब उनके डेट के हिसाब से वह दिन आएगा।

ना कि वह हमारे त्यौहारों का सम्मान करके मदर्स डे और डॉटर्स डे का डेट बदल कर हमारे नवरात्रि मनाने लगे।

सच ही कहा है अंग्रेज तो चले गए अपनी औलादे छोड़ गए।

और उनकी औलाद कहलाने  मे लोग अपने को गौरवान्वित महसूस करते हैं।

अंग्रेज औलाद के रूप:-

भाषा;-अंग्रेजी

त्योहार,:-

न्यू ईयर, वैलेंटाइन डे, फ्रेंडशिप डे, मदर्स डे, डॉटर्स डे ,चॉकलेट डे हग डे, किस डे पता नहीं कौन-कौन से डे ।

पता नहीं कौन-कौन से डे।

धन्यवाद दोस्तों।

23-12-20

Rani blog

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