हेलो दोस्तों आजकल लगभग बहुत चल रहा है । हमारी बच्चियां इस चक्रव्यूह में कैसे फंस जाती हैं या यूं कहिएकी छोटी मानसिकता के लोग के चक्कर में हमारी बच्चियों कैसे फंसाते हैं इसी बारे में मैं कुछ अपने विचार सकती हूं सहमत हूं तो जरूर सम्मान दीजिए इन विचारों को और अपने बच्चों को पढ़ाइए इन विचारों को।

माना कि प्रेम एक पवित्र शब्द है। परंतु जैसा कि मैंने फोटो इमेज में कहा है प्रेम में अगर छलावा है तो वह प्रेम नहीं है। हमारी बच्चियों को इस भेद को समझना ही चाहिए। और अगर यह ट्रेंड इस समय जोर शोर से चल रहा है और किसी का पूरा का पूरा केंद्र बिंदु हमारी सभ्यता और संस्कृति पर प्रहार करना है तो हमारा फर्ज है कि हम अपने धर्म सभ्यता संस्कृति की खातिर अपने प्रेम का वलिदान दें।

मैं जानती हूं की लड़कियों के लिए प्रेम एक ऐसी चीज होती है कि जिससे वह कर लेती हैं वह किसी और के बारे में नहीं सोच पाती हैं। लड़कियों के अंदर यह चीज होती है कि जिससे वह प्रेम करते हैं उसके शरीर को भी वही है स्पर्श करें जिसे वह प्रेम करती हैं। अगर आपको कहीं से पता चल रहा है कि यह इंसान यह पुरुष आपके साथ धोखा कर रहा है तो आपको एक ही क्षण में दिमाग से उस इंसान का वजूद ही निकाल देना चाहिए।

*क्योंकि जान है तो जहांन है।*

और मेरी प्यारी बच्चियों प्रेम और फर्ज एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

क्योंकि प्रेम से ही फर्ज पैदा होता है

और जहां फर्ज निभाने की प्रेरणा होती है वह सचमुच प्रेम से ही पैदा होती है ।

क्योंकि जब तक आप अपने महबूब से नहीं मिले होते हैं या जानते भी नहीं होते हैं सीधी सी बात कहूं कि प्रेम में नहीं पड़े होते हैं तब तक आप अपने मां-बाप के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार होते हैं मगर जैसे ही आप प्रेम में पड़ जाते हैं वही महबूब आपके लिए सब कुछ हो जाता है उसके लिए आप अपने धर्म संस्कृति सभ्यता तक बदलने के लिए तैयार हो जाते हैं यह कैसा प्यार है..?

अगर सामने वाला इंसान कहता है कि आप अपने घर से पैसे और जेवर लेकर मेरे साथ भाग चलो तो यह किस तरीके का प्यार है? और अगर कोई ऐसा कहता भी है तो आपको तुरंत समझ जाना चाहिए कि यह प्यार नहीं है यह सिर्फ छलावा है और तुरंत ही उसके और अपने रास्ते अलग कर लेने चाहिए।

सच कहूं तो अगर आप प्रेम की जरा सी भी परिभाषा समझते हैं   तो आप कभी भी ऐसा कोई कार्य नहीं करोगे जिससे आपके मां-बाप के मुंह पर कालिख पुते।

क्या महबूब के आते ही आप इतने खुदगर्ज हो जाएंगे कि अपने मां-बाप की भावनाओं को ही चोट पहुंचाने लगेंगे।

प्रेम की परिभाषा समझनी है तो बॉर्डर पर खड़े जवानों से सीखो।

क्या उन्हें अपने महबूबा, पत्नी बच्चे और मां-बाप से प्यार नहीं होता .?

  • मगर उन्होंने देश प्रेम को अपनी व्यक्तिगतप्रेम से भी ऊपर रखा। और देश के प्रति उनका क्या कर्तव्य है उसके लिए वह अपनी जान तक मिटाने के लिए तैयार हो जाते हैं।क्या उन्हें नहीं पता क्योंकि मरने के बाद उनका परिवार कितना अकेला हो जाएगा। फिर भी वह समझते हैं की व्यक्तिगत प्रेम से ऊपर देश के प्रति फर्ज होता है। और यह सभी फर्ज हमारे जीवन में अलग-अलग मोड़ पर मिलते रहते हैं। और हमें यथासंभव इन कर्तव्यों पर खरा उतरने की कोशिश करनी चाहिए।

इसलिए मेरे नवयुवक और नवयुवतियों दोनों से ही कहना चाहूंगी कि प्रेम के ऊपर पहले फर्ज को रखा करो।

लव जिहाद और मां-बाप का कर्तव्य।

अभी तो मैंने यह बात अपनी बहन बेटियों को समझाने के लिए लिखी थी कि कोई अराजक तत्व हमारी इज्जत सभ्यता संस्कृति पर चोट पहुंचाने के लिए सक्रिय है तो हमारी बहन बेटियों को जागरूक होना चाहिए।और आजकल तो इंटरनेट गूगल यूट्यूब सबकुछ अवेलेबल है कि आप लोगों को किस तरीके से वेकूफ बनाया जाता है। यह आप तुरंत पता कर सकते हैं

और अराजक तत्व किसी भी रूप में हो सकते हैं जरूरी नहीं है कि वह लव जिहाद ही हो।

अब चलिए बात करती हूं मां बाप की कि मां-बाप की क्या जिम्मेदारी है।

हमारे देश में आज भी बच्चों से मां-बाप खुलकर बात नहीं करते हैं यह मैंने अपने आसपास देखा और खुद की अपनी जिंदगी से मैं जानती हूं कि मेरी मां मुझसे कभी कोई बात नहीं करती थी मुझे कोई भी प्रॉब्लम होती थी खुद ही सॉल्व करनी होती थी जबकि मेरी एक भाभी भी थी वह भी मुझसे किसी भी तरीके की कोई बात नहीं करती थी। क्योंकि उनकी और मेरी बनती नहीं थी। लेकिन एक औरत होने के नाते उनको मुझे समझना चाहिए था।उन्हें कभी भी बोलना चाहिए था कि तुम्हें किसी भी तरीके की कोई प्रॉब्लम हो तो मुझसे आकर बात करना लड़ाई झगड़े अपनी जगह है। मगर उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया।लेकिन जो चीज मैंने महसूस किया अपने जीवन में वह मैंने अपनी बेटियों के साथ होने नहीं दी। मैंने बचपन से ही अपनी बेटियों से हर टॉपिक पर खुलकर बात की ये अलग बात है कि वह मुझसे कितना बात करती हैं  फिर भी जहां तक मुझे लगता है मैं उनके हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार रहती हूं।

मेरी दो बेटियां हैं एक 20 साल की है एक 11 साल की है।

गौर करने वाली बात यह है कि जब कानपुर शहर में कुछ ही महीने पहले एक ही मोहल्ले से 5 हिंदू लड़कियां मुसलमान लड़कों के साथ भागी हुई थी।

तो मेरी बड़ी बेटी ने मुझसे बोला कि अपने भारत देश में बच्चों से बात करना बड़ा अचंभा माना जाता है शायद पैरंट्स अपने बच्चों से खुलकर बात करें तो यह नौबत नहीं आ सकती।

जानते हैं तभी मेरा मन हुआ कि मैं इस टॉपिक पर लिखूं पर नहीं लिखा क्योंकि जो प्रेम पर लिखता है वह एक अच्छी विचारधारा कैसे रख सकता है।पर जैसे कि मैंने कहा कि प्रेम और फर्ज एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

और  

और फर्ज के आगे मैं प्रेम को कुछ भी नहीं समझती हूं।

हमारे देश में एक बेटा सबको बता सकता है कि उसकी कोई गर्लफ्रेंड है मगर एक बेटी नहीं बता सकती क्यों लड़कों से बात भी करती है। क्योंकि वह जानती है कि अगर उसने कुछ बताया तो सिवाय मार पिटाई  और पाबंदियों के अलावाकुछ नहीं होगा उसके साथ।यह हम घर से ही भेदभाव शुरू कर देते हैं और लड़कियां अपने मन की बात छुपाना शुरू कर देती हैं।

पैरंट्स को यह समझना चाहिए आपके बेटे की कोई गर्लफ्रेंड है तो वह किसी की बेटी है इसलिए जब आप की बेटे की गर्लफ्रेंड हो सकती है तो आपकी बेटी का भी कोई फ्रेंड हो सकता है। इस बात पर नजर रखें और अपनी बेटी से खुलकर बात भी कीजिए आप केवल इतना विश्वास में लीजिए कि आप मर्यादा में रहेंगे तो हमें कोई भी प्रॉब्लम नहीं है। और यदि तुम किसी को पसंद करती हो और तुम उससे विवाह करना चाहती हो तो हमें एक बार जरूर बताना और उस इंसान से हमें मिलवा ना जरूर। यदि वह तुम्हारे लायक होगा तो हम जरूर उस पर गौर करेंगे। मगर वह तुम्हारे लायक नहीं हुआ तभी हम विरोध करेंगे।क्योंकि तुम हमारी बेटी हो और हमसे ज्यादा अच्छा बुरा तुम्हारा कोई नहीं समझ सकता है। तुम्हारे पांव में कांटा भी चुभेगा दर्द हमें ही होगा समाज को नहीं होगा।हमें समाज की नहीं केवल हमें तुम्हारी परिवाह है कि तुम किसी गलत रास्ते पर ना जाओ जिससे आगे भविष्य में तुम्हें बहुत पछताना पड़े। और हम भी तुम्हारा साथ देने में अक्षम हो जाएं। मगर तुम हमारी बेटी हो आखरी सांस तक हर कदम पर तुम्हारा साथ देंगे।

मेरा अनुमान है कि आपकी बेटी आपसे खुलकर बात करने लगेगी और जब बात होती है तो आप समझ सकते हैं कि आपका बच्चा किस राह पर जा रहा है और आपको लगता है कि आपका बच्चा गलत  जा रहा है तो प्लीज आप समझाने की कोशिश कीजिए रिश्तेदारों की मदद लीजिए। जो भी आपके हितेषी हो क्योंकि किसी किसी को काउंसलिंग करनी बहुत अच्छे से आती है।और यदि आपका बच्चा जिसे पसंद करता है वह उसके लायक नहीं है तो आप किसी काउंसलर की मदद लीजिए।आप अपने कर्तव्यों से मुंह मत मोड़ो अपने बच्चे को जितना कोशिश हो सके सही रास्ते पर लाने की कोशिश जरूर करिए। समाज की परवाह मत करिए समाज की आदत है कि आपका बच्चा गलती करें और आप पर हंसे।

मां से अच्छा बेटियों का कोई दोस्त नहीं होता।

मुझे लगता है बेटी को एक मां अपने नजदीक इस तरीके से ला सकती हैं कभी कभार अपना टीनएज यंग एज की बातों को उससे शेयर जरूर करें। उतना ही जितना आपको ठीक लगे।

जब आप अपनी बात उससे शेयर करने लगेंगे तो अपने आप ही उसको आप में एक फ्रेंड देखने लगेगी और वह हर बात आपसे शेयर करने लगेगी।

मैं खाली यहां पर अपने विचार नहीं रख रही हूं मैं अपने बच्चों से इसी तरीके से बात करती हूं ताकि वह कोई भी बात करने में मुझसे झिझक ना खाएं।

जरूरी नहीं है कि आपका बच्चा इतना फ्रेंडली होने के बावजूद भी आप से हंड्रेड परसेंट बाद शेयर करें लेकिन 95% बाद वह आपसे शेयर करने लगेगा।

उसी में आप बहुत कुछ पकड़ सकते हो।

इतना तो बच्चे भी जानते हैं कि पेरेंट्स तो पेरेंट्स ही होते हैं।

लेकिन अगर वह दो-चार बात नहीं बताते आपको तो उसको इग्नोर भी करिए कुछ अपनी बातें याद करके।

और हां एक बात अपने बच्चियों से मन में माता और पिता दोनों ही डाल दें कि  तुमसे कभी भी कोई गलती से भी गलती हो, और उस पर तुम्हें पछताप हो और तुम्हारी किसी गलती की वजह से कोई तुम्हें ब्लैकमेल कर रहा हो।तो आकर हमें जरूर बताना डरना नहीं। क्योंकि हम मां बाप हैं तुम्हारे।हो सकता तुम कोई बात बताओ तो हमें गुस्सा आएगा मगर हम तुम्हारा आहित कभी नहीं सोचेंगे हर कदम पर हम तुम्हारा साथ देंगे चाहे हमें समाज से या सिस्टम से जितना भी लड़ना पड़े।

आशा करती हूं कि अगर आपका बच्चा इतना फ्रेंडली है तो कोई भी नालायक और धूर्त व्यक्ति हमारी बच्चि को भगा नहीं ले जा सकता।

वैसे भी इंटरनेट पर इतनी जानकारी तो हमारी बच्चि को भी मिल जाती है की लव जिहाद के नाम पर उनका टारगेट केवल हिंदू लड़कियों से शादी करके बच्चे पैदा करना ही होता है उन्हें प्रेम मोहब्बत से कोई मतलब नहीं होता है। क्योंकि उनको लगता है कि हिंदू लड़कियों का जींस बहुत अच्छा होता है।

यह जानकारी मेरी बड़ी बेटी ने दी थी मुझे।

वैसे लिखने को तो बहुत कुछ लिख सकती हूं पर टॉपिक बड़ा हो जाएगा नेक्स्ट टाइम बहुत कुछ लिखूंगी।

सच्चा इश्क फर्ज की खातिर खुद की कुर्बानी चाहता है।

मैं यह बात इसलिए कह रही हूं कि आपका प्रेम परीक्षा जरूर मांगता है। मान लीजिए आपको किसी से प्रेम है और आपके मां-बाप राजी नहीं हैं। राजी ना होने के कई कारण हो सकते हैं।

फिर आपको चुनाव करना होता है कि आप मां-बाप को दुखी करें या अपने प्रेमी को।

प्रेमी को दुखी करने का मतलब है कि आप खुद दुख में रहेंगे।

मगर मां बाप को दुखी करने का मतलब है कि आप जीवन भर खुद से घृणा करने लगेंगे।

और उसी प्रेमी को आप पर शक होने लगेगा।

जो लड़की अपने मां बाप की नहीं हुई वह मेरी क्या होगी..?

फिर आप अपने लाइफ में इतनी आगे निकल चुके होते हैं कि दर्द सहते हुए भी आपको वही रहना पड़ता है आप पीछे मुड़ कर मां-बाप के पास नहीं आते हो।

अगर आपका प्रेमी सच में आपसे प्रेम करता है तो यह जरूर बोलेगा कि अपने मां-बाप को दुखी मत करो। क्योंकि उनका तुम पर अधिकार है और तुम्हारा उनके प्रति फर्ज है कि उनको कोई दुख कष्ट ना हो।

समाज की जिम्मेदारी

हमारे समाज में किसकी बेटी भागी है किसके बच्चे ने गलत काम किया है इसके लिए तो चर्चा होगी और उसका मजाक भी उड़ाया जाएगा। खासकर अगर हमारी बेटी दूसरे मजहब में चली जाती है तब तो मजाक का ऐसा पात्र बनता है परिवार जिसकी  कि कोई हद ही नहीं है।

मगर समाज इसमें अपनी जिम्मेदारी कुछ भी नहीं समझता है।

अगर हमें अपनी सभ्यता संस्कृति पर इतना गुमान है और हम इस को बचाना चाहते हैं तो हम इस बात को पर हंसे नहीं कि उसकी बेटी किसी मुस्लिम के साथ भाग गई या किसी क्रिश्चियन के साथ भाग गई बल्कि इस बात पर गौर करें कि हमारी बच्चियां अपना धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में क्यों जा रही हैं।मजाक आज आप किसी एक परिवार का उड़ा रहे हैं कल के दिन यही मजाक आपके परिवार का भी बन सकता है क्योंकि जनरेशन तो हमेशा चलती ही रहनी हैं। हम नहीं जानते कि हमारे आने वाले कल में हमारे बच्चे कैसे निकलेंगे।मगर हम अपने बच्चों को अच्छे संस्कार और सभ्यता देने का प्रयास तो कर ही सकते हैं और यह पूरी समाज की जिम्मेदारी बनती है।अगर हमें कहीं भी पता चलता है कि किसी की भी बेटी किसी अलग मजहब के इंसान से प्रेम करती है तो यह हम सबको मिलकर उस बेटी को उस नर्क से निकालने की कोशिश करनी चाहिए ना की मजाक उड़ाना चाहिए। जिस तरह मुस्लिम यह वक्त हमारी बच्चियों का ब्रेनवाश करके अपने प्रेम जाल में फंसा लेते हैं।

क्या हमारे समाज में कोई भी ऐसा वक्ता नहीं होगाजो हमारी बच्चों को अच्छी बातें सिखा सकें और अपने धर्म के प्रति प्रेम करना सिखा सके।क्योंकि किसी किसी की बातों में इतना दम होता है कि बच्चे उनकी बात जल्दी सुन लेते हैं । यह एक कला हैकि दूसरे का ब्रेनवाश कैसे किया जाए और उसके दिमाग में अपनी बातें कैसे भरी जाए। इस तरीके के आयोजन होने चाहिए कि हम अपने बच्चों को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक करें। और हमारी बच्चियां अपने धर्म से भागे नहीं।

अंत में यही कहना चाहूंगी कि आपको मेरी बात अच्छी लगी हो तो शेयर जरूर करिएगा।

धन्यवाद

चल

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