जख्म लेने से खौफ नही खाती हूँ साहिब ….बस खौफ तो इस कारण होता है कि….जख्म मुझे और दर्द उसे होता है ।

प्रेम मे डूबे प्रेमियो की यही परेशानी होती है कि

किसी एक को परेशानी होती है तो दूसरे को अपने आप वो दर्द महसूस हो जाता है ।

बस यह प्यार आंतरिक होना चाहिए ।फिर आप ये समझ सकते है या अनुभव कर सकते है कि आप के महबूब ने कब आप को याद किया और कब आप को ख़यालो मे श्पर्श किया ।

कब कोई हवा का झौका उसको स्पर्श करके आया और तुमको चूम कर चला गया ।

कब उसके पैरो की धूल उड़कर आई और तुम्हारे माथे पर सिंदूर कि तरह लग गई ।यही अनुभव एक पुरुष भी कर सकता है ,कि कब उसकी महबूबा के हाथो को छूकर कोई धूल उड़कर आई और तिलक बन कर माथे पर लग गई ।

इश्क़ तो इश्क़ है साहिब

दफन तो होता है पर मरता नहीं है ॥

जरूरी नही है जीवन मे आपको आपका इश्क़ मुकम्मल हो जाए ।पर उसको आसानी से भुला दिया जाये ये भी संभव नही है ।पर उसके बिना जीना सबको आ जाता है क्यो कि आफ्नो के बिना जीने का हुनर ईश्वर प्रदत्त स्वभाव है हमारा ।

नही समझे दोस्तो तो समझती हूँ …….

हम जन्म से ही देखते है कि हमारा कोई चाहे जितना प्राण प्रिय हो लेकिन जब वो दुनिया को छोड़कर जाता है तो कुछ दिन उसके बिना बेचैनी या अकुलाहट होती है पर कुछ दिनो मे हम सामान्य ज़िंदगी जीने लगते है ।

ठीक उसी तरह हम अपने प्रेमी या प्रेमिका के विछुड्ने पर कुछ दिनो तक बेचैन या एक हद तक पागल जैसे हो जाते है पर बाद मे सभी सामान्य जीवन जीने लगते है ।

कोई भी प्रेमी वह नर हो या नारी इस जगत को सुचारू रूप से और सामाजिक व्यवस्था के अधीन चलाने के लिए भारत जैसे देश मे विवाह बंधन मे तो बंधना ही पड़ता है ।लेकिन ये सच है कि प्रेम मे डूबा इंसान नए ग्रहस्थ जीवन को आसानी से स्वीकार नही कर पाता पर उस नए साथी के साथ एक अच्छा तारतम्य बिठाकर और अपने मन को समझाकर बेहतर से बेहतर ग्रहस्थी कि गाड़ी चलाने मे पूरी कोशिश करता है ।और अपने अतीत को अन्तर्मन के किसी कोने मे गठरी बांध कर डाल देता है ।

ताकि कोई उसके महबूब को कभी ये न कह पाये कि तेरा महबूब तो ऐसा निकला कि अपनी घर ग्रहस्थी भी ठीक से न सम्हाल पाया ।उसके किसी भी कार्य की वजह से उसके महबूब का सिर कभी भी झुकने न पाये। यही सोच कर वह नए जीवन को दर्द सहकर भी मुस्करा कर जीते चले जाते है ।

धन्यवाद दोस्तो मेरे लेख को पढ़ने के लिए ।
आशा करती हू किआपको लेख पसंद आए तो लाइक और कॉमेंट जरूर करे ।

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